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स्वस्तिक – Swastika

Swastika

स्वस्तिक
स्वस्तिक का अर्थ है – “स्व का अस्तित्व ” . इसकी चार भुजाएं है , बिलकुल बराबर बराबर .यह दर्शाती है मनुष्य जीवन के चार आश्रमों को . इसके चार बिंदु दर्शाते है आत्मा की निरंतरता को . बराबर आकार की भुजाओं का अर्थ है चारो आश्रमों का काल
बराबर बराबर हो . मान लिया जाए की मनुष्य की आयु सौ वर्ष है , तो ब्रम्ह्चर्याश्रम यानी की अध्ययन , शिक्षा का समय २५ वर्ष हो . गृहस्थ आश्रम का समय २५ वर्ष हो . वानप्रस्थाश्रम यानी की सिर्फ खुद के बारे में ना सोच कर समाज के लिए कार्य करने का समय ५० वर्ष की उम्रे के बाद २५ वर्ष हो . फिर ७५ वर्ष की आयु के बाद इश्वर से योग का प्रयास शुरू कर देना चाहिए जो की इस शरीर के छूटने तक चलता रहे . मृत्यु यानी की परमात्मा के साक्षात्कार का दिन भी एक उत्सव की तरह हो . यही है स्वस्तिक का सुन्दर भारतीय दर्शन .
पर आज स्वस्तिक की यह भुजाएं असंतुलित हो गई है . १० वर्ष की आयु के बाद ब्रम्हचर्य से मन उचट जाता है क्योंकि आस पास का माहौल ही दूषित है . फिर गृहस्थाश्रम में सिर्फ खुद के सुख पर और जीवन साथी पर ही ध्यान केन्द्रित रहता है . इसमें माता पिता , बुजुर्गों , अतिथियों और अन्य सम्बन्धियों के लिए कोई स्थान नहीं है . यह आश्रम भी कभी कभी खंडित हो जाता है . इस आश्रम को मनुष्य जब तक जीवन हो , चलाते रहना चाहता है . अगर शरीर साथ छोड़ दे तो दवाइयों के सहारे और जीवन साथी साथ छोड़ दे तो दुसरे की तलाश कर वह मृत्यु पर्यंत घर के पचड़ों में फंसा रहता है जब तक की मौत ना आ जाए . तब मृत्यु उसे दुःख देने वाली प्रतीत होती है और वह उससे भय अनुभव करता है .समाज के कार्यों के लिए और बिछड़े हुए परमात्मा से मिलने का जतन कोई नहीं करता . जिसके फलस्वरूप आज हर कोई दुखी है ……….

 Story Source: पूज्य आचार्य

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Swastika
Swastika means – “the existence of self.” It has four sides, all equal., It exhibits four shelters for human life. The four points represent the continuity of the soul. Means the period of the four arms of equal size ashrams
Be equal. Assuming the hundred year old man, so Brmhcharyasrm of the study, while 25 years of education. Householder ashram 25 years’ time. Then the lord of yoga since the age of 75 should start trying to run up to the release of the body. Death of the divine is like a celebration of the day. That’s fine Indian philosophy swastika.
Today on the arms of the swastika has become unbalanced. Uct Brmhchary since the age of 10 because the mind is corrupted atmosphere around. Then Grihsthasrm and spouses only to find themselves the focus remains on. The parents, the elderly, there is no place for guests and other relatives. The ashram is also sometimes fragmented. The ashram until human life, is to be run. Today everyone is unhappy result

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