Home / Literature / Ashok Chakradhar / A Poem by Ashok Chakradhar : Kam Se Kam , कम से कम

A Poem by Ashok Chakradhar : Kam Se Kam , कम से कम

Ashok Chakradhar -1

Kam Se Kam

कम से कम

एक घुटे हुए नेता ने
छंटे हुए शब्दों में
भावुक तकरीर दी,
भीड़ भावनाओं से चीर दी।
फिर मानव कल्याण के लिए
दिल खोल दान के लिए
अपनी टोपी घुमवाई,
पर अफ़सोस
कि खाली लौट आई।

टोपी को देखकर
नेता जी बोले-अपमान जो होना है सो हो ले।
पर धन्यवाद,
आपकी इस प्रतिक्रिया से
प्रसन्नता छा गई,
कम से कम
टोपी तो वापस आ गई।

 

 

Ashok Chakradhar

About Mohammad Daeizadeh

  • تمامی فایل ها قبل از قرار گیری در سایت تست شده اند.لطفا در صورت بروز هرگونه مشکل از طریق نظرات مارا مطلع سازید.
  • پسورد تمامی فایل های موجود در سایت www.parsseh.com می باشد.(تمامی حروف را می بایست کوچک وارد کنید)
  • Password = www.parsseh.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

*