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Pippali – पिप्पली – Indian long pepper

Pippali

पिप्पली (Indian long pepper)
वैदेही,कृष्णा,मागधी,चपला आदि पवित्र नामों से अलंकृत,सुगन्धित पिप्पली भारतवर्ष के उष्ण प्रदेशों में उत्पन्न होती है | वैसे इसकी चार प्रजातियों का वर्णन आता है परन्तु व्यवहार में छोटी और बड़ी दो प्रकार की पिप्पली ही आती है | बड़ी पिप्पली मलेशिया,इंडोनेशिया और सिंगापुर से आयात की जाती है,परन्तु छोटी पिप्पली भारतवर्ष में प्रचुर मात्रा में उत्पन्न होती है | इसका वर्ष ऋतू में पुष्पागम होता है तथा शरद ऋतू में इसकी बेल फलों से लद जाती है | बाजारों में इसकी जड़ पीपला मूल के नाम से मिलती है | यह सुगन्धित,आरोही अथवा भूमि पर फैलने वाली,काष्ठीय मूलयुक्त,बहुवर्षायु,आरोही लता है | इसके फल २.-३ सेमी लम्बे,२. मिमी चौड़े,कच्चे शहतूत जैसे,किन्तु छोटे व बारीक,पकने पर लाल रंग के व सूखने पर धूसर कृष्ण वर्ण के होते हैं | इसके फलों को ही पिप्पली कहते हैं |
पिप्पली के विभिन्न औषधीय गुण –

१- पिप्पली को पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से सिर दर्द ठीक होता है |

२- पिप्पली और वच चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर ३ ग्राम की मात्रा में नियमित रूप से दो बार दूध या गर्म पानी के साथ सेवन करने से आधासीसी का दर्द ठीक होता है |

३- पिप्पली के १-२ ग्राम चूर्ण में सेंधानमक,हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर दांत पर लगाने से दांत का दर्द ठीक होता है |

४- पिप्पली,पीपल मूल,काली मिर्च और सौंठ के समभाग चूर्ण को २ ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ चाटने से जुकाम में लाभ होता है |

५- पिप्पली चूर्ण में शहद मिलाकर प्रातः सेवन करने से,कोलेस्ट्रोल की मात्रा नियमित होती है तथा हृदय रोगों में लाभ होता है |

६-पिप्पली और छोटी हरड़ को बराबर-बररबर मिलाकर,पीसकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह- शाम गुनगुने पानी से सेवन करने पर पेट दर्द,मरोड़,व दुर्गन्धयुक्त अतिसार ठीक होता है |

७- आधा चम्मच पिप्पली चूर्ण में बराबर मात्रा में भुना जीरा तथा थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रातः खाली पेट सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है |

Story Source: पूज्य आचार्य

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Pippali (Indian long pepper.)
Miss. vaidhehi, Krishna, magdhi, ornamented the Holy names chapla etc., arise in the warm, fragrant pippali set | By the way it comes to describe the four species but in practice does the same two types of small and large pippali | Malaysia, Indonesia and Singapore to import large pippali is but little is occur in abundant pippali set | This year is the pushpagam and Sharad ritu ritu is lavish with its Bell fruit | Markets its root is the original name of pipla | This aromatic, ascending or spreading on the land,Get mulyukt, bahuvarshayu, reacts ascending | Its fruit 2.-3 cm long, 2.5 mm wide, raw berries such as, but small and finely chopped, ripening red color and drying are gray on the Krishna character | Its fruits as pippali |
Pippali various medicinal properties-

1-to give it into the water on the forehead pippali liniment headache is right |

2-to take equal amounts and pippali vach powders 3 gram amounts of regular milk or with hot water twice to the pain of migraines is OK |

3-1-2 grams of pippali sendhanmak in powder, turmeric and mustard oil by imposing on all teeth tooth pain is fine.

4-pippali, sambhag of the original bodhi tree, pepper and saunth powder 2 g in the amount of honey would benefit in the chatne with colds.

Mixing honey in weaning 5-pippali powders, the amount of regular cholesterol intake and cardiovascular diseases would benefit |

6-all equal and pippali harad-barrabar, give it a spoonful of warm water in the morning to evening on abdominal pain, torsion, and durgandhayukt diarrhoea is OK |

7-1/2 tsp roasted cumin powder in equal amounts and pippali a little rock salt has been used empty stomach with buttermilk drink would benefit in the hemorrhoids

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