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Pan – पान

Pan

पान

पान का प्रयोग भारतवर्ष में सिर्फ़ खाने के लिए ही नहीं अपितु पूजन , यज्ञ तथा अतिथियों के स्वागत इत्यादि में भी किया जाता है , पान को औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है , जिससे आज हम आपका परिचय करने जा रहे हैं ——-

१- मुँह के छालों के लिए पान के पत्तों के रस में शहद मिलाकर लगाने से लाभ होता है , यह प्रयोग दिन में दो -तीन बार किया जा सकता है |

२-घाव के ऊपर पान के पत्ते को गर्म करके बांधें तो सूजन और दर्द शीघ्र ही ठीक होकर घाव भी ठीक हो जाता है |

३-शरीर में होने वाली पित्ती होने पर , एक चम्मच फिटकरी को थोड़े से पानी में डालें , तीन खाने वाले पान के पत्ते लें | फिटकरी वाले पानी में मिलाकर इन पत्तों को पीस लें | इस मिश्रण को पित्ती के चिकत्तों पर लेप करें , लाभ होगा |

४ – मोच आने पर पान के पत्ते पर सरसों का तेल लगाकर गर्म करें , फिर इसे मोच पर बांधें शीघ्र लाभ होगा |

Story Source: पूज्य आचार्य

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Pan

Pan using set up not only to eat but only in worshipping, immolation and is also used in the reception of the guests, etc., as well as Pan is used, so that today we are going to introduce — — — — — — —

1-mouth leaves the Pan juices to bark at all would benefit by applying honey, it could be two or three times a day |

2-wound up betel leaves by bandhen warm so the inflammation and pain and wounds heal soon also goes well.

3-the hives in the body, one teaspoon three to insert little water, phitkari that betel leaves bike | All these leaves in water to grind phitkari bike | This blend will benefit the liniment on the contact of the hives |

The 4-sprains betel leaves on mustard oil with hot, then it will quickly gain bandhen on Mocha

 

 

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