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पीलिया – Jaundice

Jaundice

पीलिया

रक्त में लाल कणों की निश्चित आयु होती है | यदि किसी कारण इनकी आयु कम हो जाए और ये जल्दी ही अधिक मात्रा में नष्ट होने लगें तो पीलिया होने लगता है | यदि जिगर का कार्य भी पूरी तरह न हो तो पीलिया हो जाता है | हमारे रक्त में बिलीरुबिन नामक पीले रंग का पदार्थ होता है | यह पदार्थ लाल कणों के नष्ट होने पर निकलता है इसलिए शरीर में पीलापन आने लगता है | त्वचा का पीलापन ही पीलिया कहलाता है | रोग बढ़ने पर सारा शरीर हल्दी की तरह पीला दिखाई देता है | इस रोग में जिगर, पित्ताशय , तिल्ली और आमाशय आदि खराब होने की संभावना रहती है | अत्यंत तीक्ष्ण पदार्थों का सेवन, अधिक खटाई , गर्म तथा चटपटे और पित्त को बढ़ने वाले पदार्थों का अधिक सेवन,शराब अधिक पीने आदि कारणों से वात , पित्त और कफ कुपित होकर पीलिया को जन्म देते हैं| कुछ प्रयोग निम्न प्रकार हैं —–
1- ५० ग्राम मूली के पत्ते का रस निचोड़कर १० ग्राम मिश्री मिला लें, और बासी मुहँ पियें |
2- पीलिया के रोगी को जौं ,गेंहू तथा चने की रोटी ,खिचड़ी ,हरी सब्ज़ियाँ,मूंग की दाल तथा नमक मिला हुआ मट्ठा आदि देना चाहिए |
3- तरल पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए |
4- रोगी को भोजन बिना हल्दी का देना चाहिए तथा मैदे से बनी वस्तुएं ,खटाई ,उड़द ,सेम ,सरसों युक्त गरिष्ठ भोजन नहीं देना चाहिए |
5- कच्चे पपीते का खूब सेवन करें | पका हुआ पपीता भी पीलिया में बहुत लाभदायक होता है |
6- उबली हुई बिना मसाले व मिर्च की सब्ज़ी का सेवन करें |
7- मकोय के ४ चम्मच रस को हल्का गुनगुना करके सात दिन तक सेवन करें ,लाभ होगा |
8- पीलिया के रोगी को पूर्णतः विश्राम करना चाहिए तथा नमक का सेवन भी कम करना चाहिए |
9- अनार के रस के सेवन से रुक हुआ मल निकल जाता है और पीलिया में फायदा होता है |
10- आंवला रस पीने से भी पीलिया दूर होता है |

 Story Source: पूज्य आचार्य

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Jaundice

Blood is red particles of certain age | If for some reason would be their age and large amount of destruction but soon the jaundice starts | If the liver is not solely the task of also gets jaundice | Our blood bilirubin is a yellow substance | It turns out on the horizon of a red substance particles so the body’s pallor seems to come | Pallor of the skin itself is called jaundice. Disease progression on body appears yellow like turmeric | In the liver, gall bladder disease, Spleen and gastric etc. is likely bad. Extremely sharp intake of substances, more marinade, warm and of having the gall to grow chatpate and overdose, alcohol causes vata, pitta and more drink etc and give rise to jaundice particularly resentful phlegm | Some experiments are as follows
1-50 GMS radish leaf juice and had breasts 10 GM mishri stale muhan pen |
2-jaundice patient jaun, FCI: wheat and gram bread, porridge, green vegetables, moong Dal and salt mixed should whey etc. |
3-should more intake of fluids |
4-the patient should and Sift flour after mixing of food made from turmeric without the goods, marinade, urad bean, mustard should not garishth food containing |
5-drink plenty of papite raw | Ripe papaya also is very profitable in jaundice |
Without the spices and chili 6-did have boiled vegetable intake |
4 teaspoons of Solanum nigrum juice 7-light warm drink, would benefit by seven days |
8-jaundice patient should fully relaxation and salt intake should be less.
9-Pomegranate juice intake was paralyzed by MAL slips and jaundice is in use |
10-AMLA juice drink is far from jaundice |

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