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भारत का वर्तमान, राजनितिक और आर्थिक अनिश्चितताओ से भरा हुआ है

भारत का वर्तमान, राजनितिक और आर्थिक अनिश्चितताओ से भरा हुआ है |
देश की गति और दिशा का कोई अनुमान नहीं लग रहा |
भारत को विश्व का विशालतम लोकतंत्र कहा जाता है | परन्तु एक द्रष्टिकोण ऐसा भी है , लोक तंत्र की निष्फलताए सामने आ रही है |
प्रजा के द्वारा ही चुने गए प्रतिनीधी (नेता गण) उनकी अपेक्षाओ के ऊपर खरे तो उतर ही नहीं रहे , लेकिन प्रजा की समस्याओ में वृद्धि हो ऐसे दुष्कार्य कर रहे है |
भारत में जीव
न-आवश्यक वस्तुओ और सेवाओ का मूल्य विशेष वस्तु/सेवा जितना हो चूका है |
देश ( प्रजा) की संपत्ति और देश की संपत्ति की खुले आम लुंट मची हुई है |
देश के अर्थतंत्र को हानि हो ऐसे कार्य खुद देश की सत्ता के सिंघासन पर बैठे लोग ही कर रहे है |
लोक तांत्रिक संस्थानों की गरिमा को आघात पहुंचे इस तरह जन प्रतिनिधि (नेता) अपनी सता और पद का दुरुपयोग कर रहे है |
……………….. यही सब है लोकतंत्र की निष्फलता के लक्षण ……………………..
प्रश्न यह उपस्थित होता है , की लोकतंत्र जैसी मज़बूत शाषन व्यवस्था इतनी हद तक पंगु कैसे हो गयी ??????
इसके पीछे एक ही मुख्य कारण है , भारत में से हिन्दू शाषन, न्याय और शिक्षा व्यवस्था का विधर्मीयो द्वारा नाश |
“लोकतंत्र” विश्व की प्राचीनतम संस्कृति “भारतीय संस्कृति” का विश्व को दिया गया अमूल्य प्रदान है |
यदि “लोकतंत्र” को सफलता पूर्वक सदियों तक चलाना है तो इस देश की संविधानिक, आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक, न्यायिक और रक्षा व्यवस्थाये हिन्दू-धर्मं दंड की छत्रछाया में और हिन्दू परंपरा के अनुसार चलाना अत्यंत आवश्यक होगा |
भारतीय परंपरा को मलिन कर के उनके विषम प्रभाव की मदद से इस देश का शोषण और सर्वनाश करना विधर्मीयो का परम लक्ष्य था |
भारत में अंग्रेजो और मुघलो ने अपने इस लक्ष्य को हिन्दू धर्मं का विनाश कर के कुछ हद तक हांसिल किया है |
उन्हों ने “धर्मनिरपेक्षता” के विचार से लोकतंत्र की परंपरा को मलिन किया है जिसके विषम फल आज हम भुगत रहे है |
इस देश की जनता के पास अपने जीवन उन्नति और शांति की अपेक्षा है तो “हिंदुत्व” के सिवा कोई विकल्प नहीं ……………|
अब देश की जनता को सोचना है , या तो “हिंदुत्व” को भारत देश के सिरमोर सिंघासन पर आरूढ़ कर के लोकतंत्र को सफल बनाये ; नहीं तो इस पंगु और निष्फल लोकतंत्र के विषम फल को भुगते परन्तु फ़रियाद न करे …….|

राष्ट्र की जनता, इस महान राष्ट्र की दिशा आपके हाथो में है ……………………….. फैसला आपको करना है

 Story Source: पूज्य आचार्य

India

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India’s current political and economic filled with Aniscittao |
Feel no idea of ​​the speed and direction of the country |
India is the largest democracy in the world | but also a perception that the public system is facing Nishfltaa |
Tenens subjects were chosen by the leader (s) to meet their Apecshao down, not up, but the problems are increasing in people who are Dushcary |
Life in India
Non – essential commodities and services, the value of the particular commodity / service is posed as |
Country (people) of the property and assets of the country has resembled openly Lunt |

People who hurt the dignity of Tantric institutions such as public representatives (politicians) have its nagging and abuse of office |
That’s all signs of miscarriage of democracy ……………….. …………………. ….
Here comes the question of how democracy has been crippled to such an extent as strong Shasn system??????
The main reason behind it is the same in India, the Hindu Shasn, justice and education systems destroyed by Vidharmiyo |
“Democracy” world’s oldest culture “Indian culture” has been invaluable in providing world |
If “democracy” is running successfully for centuries in this country’s constitutional, economic, social, educational, judicial and defense arrangements Hindu – Hindu tradition, religion and run under the umbrella of the penalty will be vital |
Indian tradition muddied contrasting effect with the help of their exploitation and annihilate the country’s ultimate goal was Vidharmiyo |
British in India and the Hindu religion Muglo his goal is to achieve some degree of destruction |
They “secularism” with a view to tarnish the tradition of democracy which we are suffering today is odd fruit |
Development and peace for the people of this country than their own lives, the “Hindutva” no choice but to …………… |
Now think about the people of the country, or the “Hindutva” the democracy of India, mounted on Sirmore Singasn made a success; The cripple and democracy if not sterilized, but the complaint does not suffer the odd fruit ……. |

The people of the nation, the direction of this great nation is in your hands, you have to decide

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