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Geographic map of the earth : by Veda Vyasa – पृथ्वी का भोगोलिक मानचित्र: वेद व्यास द्वारा

Geographic map of the earth

Geographic map of the earth : by Veda Vyasa

In the Mahabharata, the entire map of the Earth thousands of years ago was given . In the Mahabharata it is stated that the two fragments in the rabbit and other earth Cndramondl see fig in two parts ( leaves ) is shown as –

The above map Ramanujchary in the 11th century by the following verses of the Mahabharata was created after the Pdne –

” Sudrshnan Prvkshhyami ye Kurunandn Dwipan . Ckrasnsthitः Dweeposu Primndlo chef .
Male: Pshyedadrshe Mukmatmnः as bones . And Sudrshndweepo Cndramndle Drishyte . Dvirnshe Pipplsttr great Shasho Dvirnshe f .

– Veda Vyasa , Bhishma Parva , Mahabharata

That is

Hey Kurunandn ! The circular pattern of Sudarshan Chakra is located in the island , such as man sees my face in the mirror , just as it appears in Cndramndl island . Fig and two shares in shares in two great Shh ( rabbit ) appears . Now on paper by the above structure to organize our earth becomes a map , which shows our Earth is very similar to the actual map .

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पृथ्वी का भोगोलिक मानचित्र: वेद व्यास द्वारा

महाभारत में पृथ्वी का पूरा मानचित्र हजारों वर्ष पूर्व ही दे दिया गया था। महाभारत में कहा गया है कि यह पृथ्वी चन्द्रमंडल में देखने पर दो अंशों मे खरगोश तथा अन्य दो अंशों में पिप्पल (पत्तों) के रुप में दिखायी देती है-

उपरोक्त मानचित्र ११वीं शताब्दी में रामानुजचार्य द्वारा महाभारत के निम्नलिखित श्लोक को पढ्ने के बाद बनाया गया था-

“ सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन। परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः। एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥ द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।

—वेद व्यास, भीष्म पर्व, महाभारत

अर्थात

हे कुरुनन्दन ! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भाँति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखायी देता है। इसके दो अंशो मे पिप्पल और दो अंशो मे महान शश(खरगोश) दिखायी देता है। अब यदि उपरोक्त संरचना को कागज पर बनाकर व्यवस्थित करे तो हमारी पृथ्वी का मानचित्र बन जाता है, जो हमारी पृथ्वी के वास्तविक मानचित्र से बहुत समानता दिखाता है।

  Story Source: पूज्य आचार्य

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