Home / Hindi / Bathua – बथुआ

Bathua – बथुआ

Bathua

Bathua

Every chenopodium greens in the market these days coming days.

It’s a half foot green plant is equipped with many great qualities.Rktpit, hemorrhoids and more effective on insects |

– The base is very good medicine for the disease, so it is appendicitis. The early evening it can sap 10-15 g.

– It is anthelmintic Mutrsodk and Buddhivrdhk.

– Have kidney problems joint pain or swelling; The seeds can then brew. The greens can be taken.

– Swelling, so it can be packed by the hot poultice of the leaves. It is Wayushamk.

– Pregnant women should not eat bathua.

– Anemia Pilayen its leaves 25 grams of water mixed into juice.

– If you have liver problems, or if there are knots in the body, 10 grams of dried whole plant brew Pilayen calendar.

– Eliminating intestinal worms or blood must be pure juice of the leaves mixed with the juice of neem leaves it. The trouble urticaria, when the juice is beneficial.
– Lack of interest of general debility and weakness after fever is beneficial to eat the greens.

– Metal weakness is also beneficial to eat greens chenopodium.

– Bathua do not like to eat the greens as you eat it with a salad.

– Bathua liver disorders, increased blood erasing increases the digestive power. Delete dysfunction of the body.

– Juan in the head when the head of bathua boiling water to wash it. Juan will die head will be clear.

– Bathua boil in the lemon juice, salt and cumin mixed with irritation and pain does not drink piss.

– The digestibility enhancer, promoter interested in eating habits and eliminate constipation abdominal tone (neck) is about to make sweet.

– Feeding leaf juice mixed with sugar in the urine is open.

– The benefits of eating greens hemorrhoids.

– Raw bathua little salt mixed in a cup of juice per day die from taking worms.

***************

बथुआ

इन दिनों दिनों बाज़ार में खूब बथुए का साग आ रहा है।

– बथुआ संस्कृत भाषा में वास्तुक और क्षारपत्र के नाम से जाना जाता है बथुआ एक ऐसी सब्जी या साग है, जो गुणों की खान होने पर भी बिना किसी विशेष परिश्रम और देखभाल के खेतों में स्वत: ही उग जाता है। एक डेढ़ फुट का यह हराभरा पौधा कितने ही गुणों से भरपूर है। बथुआ के परांठे और रायता तो लोग चटकारे लगाकर खाते हैं बथुआ का शाक पचने में हल्का ,रूचि उत्पन्न करने वाला, शुक्र तथा पुरुषत्व को बढ़ने वाला है | यह तीनों दोषों को शांत करके उनसे उत्पन्न विकारों का शमन करता है | विशेषकर प्लीहा का विकार, रक्तपित, बवासीर तथा कृमियों पर अधिक प्रभावकारी है |

– इसमें क्षार होता है , इसलिए यह पथरी के रोग के लिए बहुत अच्छी औषधि है . इसके लिए इसका 10-15 ग्राम रस सवेरे शाम लिया जा सकता है .

– यह कृमिनाशक मूत्रशोधक और बुद्धिवर्धक है .

-किडनी की समस्या हो जोड़ों में दर्द या सूजन हो ; तो इसके बीजों का काढ़ा लिया जा सकता है . इसका साग भी लिया जा सकता है .

– सूजन है, तो इसके पत्तों का पुल्टिस गर्म करके बाँधा जा सकता है . यह वायुशामक होता है .

– गर्भवती महिलाओं को बथुआ नहीं खाना चाहिए .

– एनीमिया होने पर इसके पत्तों के 25 ग्राम रस में पानी मिलाकर पिलायें .

– अगर लीवर की समस्या है , या शरीर में गांठें हो गई हैं तो , पूरे पौधे को सुखाकर 10 ग्राम पंचांग का काढ़ा पिलायें .

– पेट के कीड़े नष्ट करने हों या रक्त शुद्ध करना हो तो इसके पत्तों के रस के साथ नीम के पत्तों का रस मिलाकर लें . शीतपित्त की परेशानी हो , तब भी इसका रस पीना लाभदायक रहता है .
– सामान्य दुर्बलता बुखार के बाद की अरुचि और कमजोरी में इसका साग खाना हितकारी है।

– धातु दुर्बलता में भी बथुए का साग खाना लाभकारी है।

– बथुआ को साग के तौर पर खाना पसंद न हो तो इसका रायता बनाकर खाएं।

– बथुआ लीवर के विकारों को मिटा कर पाचन शक्ति बढ़ाकर रक्त बढ़ाता है। शरीर की शिथिलता मिटाता है। लिवर के आसपास की जगह सख्त हो, उसके कारण पीलिया हो गया हो तो छह ग्राम बथुआ के बीज सवेरे शाम पानी से देने से लाभ होता है।

– सिर में अगर जुएं हों तो बथुआ को उबालकर इसके पानी से सिर धोएं। जुएं मर जाएंगे और सिर भी साफ हो जाएगा।

– बथुआ को उबाल कर इसके रस में नींबू, नमक और जीरा मिलाकर पीने से पेशाब में जलन और दर्द नहीं होता।

– यह पाचनशक्ति बढ़ाने वाला, भोजन में रुचि बढ़ाने वाला पेट की कब्ज मिटाने वाला और स्वर (गले) को मधुर बनाने वाला है।

– पत्तों के रस में मिश्री मिला कर पिलाने से पेशाब खुल कर आता है।

– इसका साग खाने से बवासीर में लाभ होता है।

– कच्चे बथुआ के एक कप रस में थोड़ा सा नमक मिलाकर प्रतिदिन लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

Story Source: पूज्य आचार्य

Down

About Mohammad Daeizadeh

  • تمامی فایل ها قبل از قرار گیری در سایت تست شده اند.لطفا در صورت بروز هرگونه مشکل از طریق نظرات مارا مطلع سازید.
  • پسورد تمامی فایل های موجود در سایت www.parsseh.com می باشد.(تمامی حروف را می بایست کوچک وارد کنید)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*


*