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ठंडाई – Mint

Mint

Mint
Holly is becoming fierce rays of the sun and weather changes. The bile in the body heat rises and begins to grow many problems. So began mint is consumed.
This bile acid, bile and stomach outbreak of much heat and complained of stomach irritation may occur when the blisters in the mouth, eyes and do Dysuria occurred, the mint should be consumed on an empty stomach in the morning. This will remove all the complaints.

Plenty of mint morning someone gets cold. In this case, do not eat cold until the mint. 2-3 days accumulated in the body, cough, catarrh – colds and colds will pass through you will be fine. Then if there is still plenty of refreshments during the morning and afternoon should not.
Regular consumption of nutritious mint freshness and coldness persists in the body, strength of mind persists, does not suffer from the heat, lack of Jlyansh in the body (dehydration), stroke, diarrhea, vomiting – diarrhea – cholera etc. are not Ailments, dry mouth, eyes burning, interruption or decrease in urination, insomnia, headaches Pittjny, to constipation, excessive sweating, etc. The complaints are not women be more bleeding.
All the materials of which the person individually and in a reasonable amount of buying it bring together the mint mixture to prepare it at home, they can use this method. This quality, purity and with a view to mix the proper amount of each material must be good.
Ingredients: coriander, poppy seeds, cucumber seeds, roses, wild lettuce seeds, khas Kulfe seeds, fennel, black pepper, white pepper and chicory, the 11 grams of detergent 50-50. Small cardamom, white sandalwood and lily bulbs kernel of sawdust, three 25-25 grams. Packaged in Imamdaste grind them all and fill in Bernie.
Kamal Giri and sandalwood powder of bulbs should be well-drained. Removing leaves and peel the lotus bulbs just have to take the hill. 10 grams of this mixture is enough for one person. Refreshments will fail as individuals, must take per person per 10 grams.

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ठंडाई
– होली से सूरज की किरणें प्रखर होने लगती है और मौसम बदलता है. इससे पित्त बढ़ने लगता है और शरीर में गर्मी बढ़ने से अनेक परेशानियां होने लगती है. इसीलिए ठंडाई का सेवन शुरू किया जाता है.
– जिनको अम्ल पित्त, पित्त प्रकोप और उदर में ज्यादा गर्मी होने की तथा पेट में जलन होने की शिकायत हो, मुँह में छाले होते रहते हों, आँखों और पेशाब में जलन हुआ करती हो, उन्हें ठंडाई का सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। इससे यह सभी शिकायतें दूर होंगी।
– शरीर में अतिरिक्त उष्णता बढ़ जाने से तथा पित्त के कुपित रहने से जिन्हे स्वप्नदोष और शीघ्रपतन होने की शिकायत हो, स्त्रियों को रक्तप्रदर होता हो, उन्हें 40 दिन तक नियमित रूप से ठंडाई का सेवन करने से लाभ हो जाता है।
– सुबह के वक्त ठंडाई का सेवन करने से किसी किसी को जुकाम हो जाता है। ऐसी स्थिति में जुकाम ठीक होने तक ठंडाई का सेवन न करें। 2-3 दिन में शरीर में संचित हुआ कफ, नजला-जुकाम के जरिये निकल जाएगा और जुकाम अपने आप ठीक हो जाएगा। यदि फिर भी हो जाए तो फिर ठंडाई का सेवन सुबह के वक्त न करके दोपहर बाद करना चाहिए।
– नियमित रूप से पौष्टिक ठंडाई का सेवन करने से शरीर में ताजगी और शीतलता बनी रहती है, दिमागी ताकत बनी रहती है, गर्मी से कष्ट नहीं होता, शरीर में जलयांश की कमी (डिहाइड्रेशन ), लू लगना, डायरिया, उलटी-दस्त-हैजा आदि व्याधियाँ नहीं होतीं, मुँह सूखना, आँखों में जलन होना, पेशाब में रुकावट या कमी, अनिद्रा, पित्तजन्य सिर दर्द, कब्ज रहना, ज्यादा पसीना आना, स्त्रियों को अधिक रक्त स्राव होना आदि शिकायतें नहीं होती।
– जो व्यक्ति सभी सामग्री को अलग-अलग खरीदकर लाना चाहे और उसे उचित मात्रा में मिलाकर घर पर ही ठंडाई का मिश्रण तैयार करना चाहे, वो इस विधि का उपयोग कर सकते हैं। ऐसा करना गुणवत्ता, शुद्धता एवं प्रत्येक द्रव्य को उचित मात्रा में मिश्रण करने की दृष्टि से अच्छा ही होगा।
सामग्री : धनिया, खसखस के दाने, ककड़ी के बीज, गुलाब के फूल, काहू के बीज, खस कुलफे के बीज, सौंफ, काली मिर्च, सफेद मिर्च और कासनी, सभी 11 द्रव्य 50-50 ग्राम। छोटी इलायची, सफेद चन्दन का चूरा और कमल गट्टे की गिरी, तीनों 25-25 ग्राम। इन सबको इमामदस्ते में कूटकर पीस लें और बर्नी में भर लें।
– कमल गट्टे की गिरि और चन्दन का चूरा खूब सूखा हुआ होना चाहिए। कमल गट्टे के पत्ते और छिलके हटाकर सिर्फ गिरि ही लेना है। इस मिश्रण की 10 ग्राम मात्रा एक व्यक्ति के लिए काफी होती है। जितने व्यक्तियों के लिए ठंडाई घोंटना हो, प्रति व्यक्ति 10 ग्राम के हिसाब से ले लेना चाहिए।

Story Source: पूज्य आचार्य

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