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Water chestnut – सिंघाड़ा

Water chestnut

Water chestnut

Fast and the water chestnut flour has many dishes .
Triangular fruit produced in these waters is like makhana . It can be eaten raw or boiled or baked dough is made . This is to make pickles .
Ankle bursts problem is the lack of manganese in the body . Water chestnut is a fruit which has the ability to Abjharb Magnij of nutrients . It is a food shortfall of blood in the body .
Recognize that women who fall pregnant before completion of the pregnancy they should eat well water chestnut . The fetus and the mother ‘s health is good nutrition is not abortion . Pregnant women should eat with milk, water chestnut . Especially for those whose pregnancy has been seven months is very advantageous . It is also fine eating disease called leukorrhea .

The drug embryo gets nourishment and keeps it stable . Seven months pregnant woman eating halva with milk or Singadhe benefits. Proper intake of Singadhe regular and healthy and beautiful baby
For Healthy Skin
Vitamin A and Vitamin C is plentiful in Singadhe which is extremely helpful in maintaining skin health and beauty . Regular eating salad in the winter as it will transform your skin and will not Draines problem .
Heat stroke bike Singadhe powder with fresh water .
Heat the patient find relief by eating its dust .
Raw Singadhe live in the property . Some people eat boiled . It is both reinforce health . Also contains digestible .
It is very good for thyroid . Singadhe in iodine , manganese minerals such as thyroid and plays an important role in the prevention of goitre .
Swelling and pain, swelling and pain ointment works Rahtः water chestnut . Singadhe swelling in any part of the body when the skin is relaxed by applying grinding .
It is a good source of antioxidants . It helps the skin to reduce wrinkles . It protects the skin from ultraviolet rays of the sun .
Pee offers tremendous benefits for patients decoction of Singadhe .
Effect of water chestnut is cold , so the heat is an advantage in diseases .
The disease gonorrhea is relaxing in the water chestnut .
Singadhe Srringark are named in the texts .
But we take the measles disease is disease free .
Is thirsting for relief in diseases of the property .
Discharge of the patient from the water chestnut or Srringark attain rest .
Antiades Singadhe fresh fruit or even after the food is fine as powder . Well as other diseases such as throat – goiter , antiaditis , LISP etc is fine .
Dried lemon juice on Singadhe Giskr Contact the shingles . At first it will take some irritation , then it will be cool . Some days it is cured by applying shingles .
Weight gain in Shaikः Singadhe starch powder is a boon for skinny people . Its regular intake causes body fat and powerful .
Uterine pregnancy may not weakness , is an abortifacient , then a few weeks would benefit from eating fresh Singadhe . Singadhe blood by eating bread – blennelytria goes well .
Anemic patients should Singadhe plenty of fruit intake .
Sigandhe to soak in the oil and flour | flour by grinding it in a grinder was found to carry palm Smbag | Make a slight soaking up plum-sized pills | 2-4 tablets in the morning Cuskr Eat , drink milk after a while | to expedite the blood is Vriddhi excitement , joy and character is improving | expectant mothers to begin the sixth month | the pregnancy and postnatal nutrition milk will Vriddhi   chocolates mothers of children place these harmful pills Pustidayi Kilayen
Precautions to eat a healthy person should eat daily 5-10 g of fresh Singadhe . Heavy water chestnut in terms of the digestive system , so much food could be harmful . May complain of heaviness in the stomach and the formation of gas . Do not drink water immediately after consuming water chestnut . This can be a pain in the stomach . If constipation may not Singadhe .

 Story Source: पूज्य आचार्य

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सिंघाड़ा
– व्रत में सिंघाड़ा और इसके आटे के अनेक व्यंजन बनाये जाते है.
– ये मखाने की तरह जल में पैदा होने वाले तिकोनाकार फल है. इसे कच्चा ही खाया जा सकता है या उबाल के या सुखा कर आटा बनाया जाता है. इसका अचार भी बनाते है.
– एड़ियां फटने की समस्या शरीर में मैगनीज की कमी के कारण से होता है। सिंघाड़ा एक ऐसा फल है जिसमें पोषक तत्वों से मैगनिज एब्ज़ार्ब करने की क्षमता है। इसे खाने से शरीर में रक्त की कमी भी दूर होती है।
– मान्यता है कि जिन महिलाओं का गर्भकाल पूरा होने से पहले ही गर्भ गिर जाता है उन्हें खूब सिंघाड़ा खाना चाहिए। इससे भ्रूण को पोषण मिलता है और मां की सेहत भी अच्छी रहती है जिससे गर्भपात नहीं होता है। गर्भवती महिलाओं को दूध के साथ सिंघाड़ा खाना चाहिए। खासतौर पर जिनका गर्भ सात महीने का हो चुका है उनके लिए यह बहुत ही लाभप्रद होता है। इसे खाने से ल्यूकोरिया नामक रोग भी ठीक हो जाता है।

– इसके सेवन से भ्रूण को पोषण मिलता है और वह स्थिर रहता है। सात महीने की गर्भवती महिला को दूध के साथ या सिंघाड़े के आटे का हलवा खाने से लाभ मिलता है। सिंघाड़े के नियमित और उपयुक्त मात्र में सेवन से गर्भस्थ शिशु स्वस्थ व सुंदर
– हेल्दी त्वचा के लिए
सिंघाड़े में विटामिन ए और विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है जो त्वचा की सेहत और खूबसूरती बरकरार रखने में बेहद मददगार है। इसे सलाद के रूप में सर्दियों में नियमित खाने से आपकी त्वचा निखरेगी और ड्राइनेस की समस्या नहीं होगी।
– लू लगने पर सिंघाड़े का चूर्ण ताजे पानी से लें।
– गर्मी के रोगी भी इसके चूर्ण को खाकर राहत पाते हैं।
– कच्चे सिंघाड़े में बहुत गुण रहते हैं। कुछ लोग इसे उबालकर खाते हैं। दोनों रूपों में यह स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है। सुपाच्य भी तो होता है।
– यह थायरोइड के लिए बहुत अच्छा है. सिंघाड़े में मौजूद आयोडीन, मैग्नीज जैसे मिनरल्स थायरॉइड और घेंघा रोग की रोकथाम में अहम भूमिका निभाते हैं।
– सूजन और दर्द में राहतः सिंघाड़ा सूजन और दर्द में मरहम का काम करता है। शरीर के किसी भी अंग में सूजन होने पर सिंघाड़े के छिलके को पीस कर लगाने से आराम मिलता है।
– यह एंटीऑक्सीडेंट का भी अच्छा स्रोत है। यह त्वचा की झुर्रियां कम करने में मदद करता है। यह सूर्य की पराबैंगनी किरणों से त्वचा की रक्षा करता है।
– पेशाब के रोगियों के लिए सिंघाड़े का क्वाथ बहुत फायदा देता है।
– सिंघाड़ा की तासीर ठंडी होती है, इसलिए गर्मी से जुड़े रोगों में लाभकर होता है।
– प्रमेह के रोग में भी सिंघाड़ा आराम देने वाला है।
– सिंघाड़े को ग्रंथों में श्रृंगारक नाम दिया जाता है।
– यह विसर्प रोग में लेने पर हमें रोग मुक्त कर देता है।
– प्यास बुझाने का इसका गुण रोगों में बहुत राहत देता है।
– प्रमेह के रोगी भी सिंघाड़ा या श्रृंगारक से आराम पा लेते हैं।
– टांसिल्स होने पर भी सिंघाड़े का ताजा फल या बाद में चूर्ण के रूप में खाना ठीक रहता है।साथ ही गले के दूसरे रोग जैसे- घेंघा, तालुमूल प्रदाह, तुतलाहट आदि ठीक होता है।
– नींबू के रस में सूखे सिंघाड़े को दाद पर घिसकर लगाएँ। पहले तो कुछ जलन लगेगी, फिर ठंडक पड़ जाएगी। कुछ दिन इसे लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
– वजन बढ़ाने में सहायकः सिंघाड़े के पाउडर में मौजूद स्टार्च पतले लोगों के लिए वरदान साबित होती है। इसके नियमित सेवन से शरीर मोटा और शक्तिशाली बनता है।
– गर्भाशय की निर्बलता से गर्भ नहीं ठहरता, गर्भस्त्राव हो जाता हो तो कुछ सप्ताह ताज़े सिंघाड़े खाने से लाभ होता है। सिंघाड़े की रोटी खाने से रक्त- प्रदर ठीक हो जाता है।
– खून की कमी वाले रोगियों को सिंघाड़े के फल का सेवन खूब करना चाहिए।
– सिघांड़े के आटे को घी में सेंक ले | आटे के समभाग खजूर को मिक्सी में पीसकर उसमें मिला ले | हलका सा सेंककर बेर के आकार की गोलियाँ बना लें | २-४ गोलियाँ सुबह चूसकर खायें, थोड़ी देर बाद दूध पियें | इससे अतिशीघ्रता से रक्त की वृद्धी होती है | उत्साह, प्रसन्नता व वर्ण में निखार आता है | गर्भिणी माताएँ छठे महीने से यह प्रयोग शुरू करे | इससे गर्भ का पोषण व प्रसव के बाद दूध में वृद्धी होगी | माताएँ बालकों को हानिकारक चॉकलेटस की जगह ये पुष्टिदायी गोलियाँ खिलायें |
खाने में सावधानियां: एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना 5-10 ग्राम ताजे सिंघाड़े खाने चाहिए। पाचन प्रणाली के लिहाज से सिंघाड़ा भारी होता है, इसलिए ज्यादा खाना नुकसानदायक भी हो सकता है। पेट में भारीपन व गैस बनने की शिकायत हो सकती है। सिंघाड़ा खाकर तुरंत पानी न पिएं। इससे पेट में दर्द हो सकता है। कब्ज हो तो सिंघाड़े न खाएं।

Story Source: पूज्य आचार्य

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