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लाल बहादुर शास्त्री जी का – Lal Bahadur Shastri

Lal Bahadur Shastri

Lal Bahadur Shastri was born on October 2, 1904, was born in Mughalsarai in Uttar Pradesh. His birthday is the same as the birthday of Mahatma Gandhi, Gandhi’s personality and ideology were like. Shastri was highly motivated by Gandhi’s ideas and lifestyle.

Uttar Pradesh after India’s independence, Shastri was appointed Parliamentary Secretary. She GB Pant Sentinel & Traffic Chief Minister’s tenure. During his tenure as prime minister Jawaharlal Nehru, May 27, 1964, after the death Shastri June 9, 1964 assumed the post of Prime Minister. Shastri prime ministerial tenure was a period of political Srgrmiyon full and fast movements. Gdaa eye on the Indian borders with Pakistan and China stood so many economic problems the country was facing. But Shastri extremely simple way to solve every problem. Farmers provider and the country’s border guards who followed his immense love towards the solution of every problem. “Jai Jawan, Jai Kisan” with the country forward.

By the time he became prime minister in 1965, the year that Islamabad had planned to snatch Kashmir from India. But Shastri showing the foresight to put a dent in Lahore, Punjab, Pakistan way forced to retreat. Pakistan condemned this act on the world stage. Pakistani dictator to save his honor, which approached the then Soviet Union in 1966 at the invitation Shastri went to Tashkent to sign a peace agreement with Pakistan. Under the agreement, India – Pakistan has agreed to return all the parts where the Indian army had pitched the victory flag.

After the deal, January 11, 1966 from a heart attack Shastri died in Tashkent. Although no official report of his death, not one has been brought to the present. Their families from time to time have been raising questions about his death.

While corruption in politics today, where each side Shastri was one such example, which were vastly prefer the simplicity and honest personality. Because of his foresight, he was forced to humble Pakistan. India did not meet the expectations of the Tashkent agreement yet know the strength of India had made the world.

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लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था. उनका जन्मदिवस गांधी जी के जन्मदिवस के समान होने की तरह व्यक्तित्व और विचारधारा भी गांधी जी के जैसे ही थे. शास्त्री जी गांधी जी के विचारों और जीवनशैली से बेहद प्रेरित थे. शास्त्री जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीवादी विचारधारा का अनुसरण करते हुए देश की सेवा की और आजादी के बाद भी अपनी निष्ठा और सच्चाई में कमी नहीं आने दी.

भारत की स्वतंत्रता के पश्चात शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रुप में नियुक्त किया गया था. वो गोविंद बल्लभ पंत के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में प्रहरी एवं यातायात मंत्री बने. जवाहरलाल नेहरू का उनके प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान 27 मई, 1964 को देहावसान हो जाने के बाद, शास्त्री जी ने 9 जून 1964 को प्रधान मंत्री का पद भार ग्रहण किया. शास्त्री जी का प्रधानमंत्री पद के लिए कार्यकाल राजनैतिक सरगर्मियों से भरा और तेज गतिविधियों का काल था. पाकिस्तान और चीन भारतीय सीमाओं पर नजरें गडाए खड़े थे तो वहीं देश के सामने कई आर्थिक समस्याएं भी थीं. लेकिन शास्त्री जी ने हर समस्या को बेहद सरल तरीके से हल किया. किसानों को अन्नदाता मानने वाले और देश के सीमा प्रहरियों के प्रति उनके अपार प्रेम ने हर समस्या का हल निकाल दिया.“जय जवान, जय किसान” के साथ उन्होंने देश को आगे बढ़ाया.

जिस समय वह प्रधानमंत्री बने उस साल 1965 में पाकिस्तानी हुकूमत ने कश्मीर घाटी को भारत से छीनने की योजना बनाई थी. लेकिन शास्त्री जी ने दूरदर्शिता दिखाते हुए पंजाब के रास्ते लाहौर में सेंध लगा पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. इस हरकत से पाकिस्तान की विश्व स्तर पर बहुत निंदा हुई. पाक हुक्मरान ने अपनी इज्जत बचाने के लिए तत्कालीन सोवियत संघ से संपर्क साधा जिसके आमंत्रण पर शास्त्री जी 1966 में पाकिस्तान के साथ शांति समझौता करने के लिए ताशकंद गए. इस समझौते के तहत भारत-पाकिस्तान के वे सभी हिस्से लौटाने पर सहमत हो गया जहाँ भारतीय फौज ने विजय के रूप में तिरंगा झंडा गाड़ दिया था.

इस समझौते के बाद दिल का दौरा पड़ने से 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में ही शास्त्री जी का निधन हो गया. हालांकि उनकी मृत्यु को लेकर आज तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं लाई गई है. उनके परिजन समय-समय पर उनकी मौत पर सवाल उठाते रहे हैं. यह देश के लिए एक शर्म का विषय है कि उसके इतने काबिल नेता की मौत का कारण आज तक साफ नहीं हो पाया है.

साल 1966 में ही उन्हें भारत का पहला मरणोपरांत भारत रत्न का पुरस्कार भी मिला था जो इस बात को साबित करता है कि शास्त्री जी की सेवा अमूल्य है.

आज राजनीति में जहां हर तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला है वहीं शास्त्री जी एक ऐसे उदाहरण थे जो बेहद सादगी पसंद और ईमानदार व्यक्तित्व के स्वामी थे. अपनी दूरदर्शिता की वजह से उन्होंने पाकिस्तान को गिड़गिडाने पर विवश कर दिया था. हालांकि ताशकंद समझौता भारत की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा पर फिर भी उन्होंने दुनिया को भारत की ताकत का अंदाजा दिला दिया था.

Story Source: पूज्य आचार्य

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