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Importance of cow ghee – गाय के घी का महत्त्व

cow ghee

Importance of cow ghee
Do not eat ghee has become a fashion today . Even after the baby is born doctors who refuse to eat ghee . Heart patients are advised to stay away from the oil . Gumata against it is a dangerous conspiracy . At least 2 teaspoons a day should eat cow’s ghee .
– Vata and pitta doshas it calms down .
– Charaka Samhita states when adding fuel to the digestive fire is to illuminate why so much heavy food is eaten , it is not quenched .
– Vata after childbirth increases the fuel consumption slips . If this turns out not obesity rises .
– Heart of a lubricants oil then drains when Blokej works .
– Constipation is helpful to remove the oil .
– The fuel to cool it in the summer when the bile rises .
– Ghee reinforces Sptdhatuon .
– Guess not afford to eat lentils simmering broth .
– Ghee obesity is eating .
– Anti Oksidents butter which helps prevent free radicals from damaging .
– Vegetable Ghee ever eat . It increases bile accumulates in the body sits on .
– Rubbing hot oil do not ever created . Draw the life force from the curd is Mthane click . Then it gets to warm ghee

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गाय के घी का महत्त्व
आज खाने में घी ना लेना एक फेशन बन गया है . बच्चे के जन्म के बाद डॉक्टर्स भी घी खाने से मना करते है . दिल के मरीजों को भी घी से दूर रहने की सलाह दी जाती है .ये गौमाता के खिलाफ एक खतरनाक साज़िश है . रोजाना कम से कम २ चम्मच गाय का घी तो खाना ही चाहिए .
– यह वात और पित्त दोषों को शांत करता है .
– चरक संहिता में कहा गया है की जठराग्नि को जब घी डाल कर प्रदीप्त कर दिया जाए तो कितना ही भारी भोजन क्यों ना खाया जाए , ये बुझती नहीं .
– बच्चे के जन्म के बाद वात बढ़ जाता है जो घी के सेवन से निकल जाता है . अगर ये नहीं निकला तो मोटापा बढ़ जाता है .
– हार्ट की नालियों में जब ब्लोकेज हो तो घी एक ल्यूब्रिकेंट का काम करता है .
– कब्ज को हटाने के लिए भी घी मददगार है .
– गर्मियों में जब पित्त बढ़ जाता है तो घी उसे शांत करता है .
– घी सप्तधातुओं को पुष्ट करता है .
– दाल में घी डाल कर खाने से गेस नहीं बनती .
– घी खाने से मोटापा कम होता है .
– घी एंटी ओक्सिदेंट्स की मदद करता है जो फ्री रेडिकल्स को नुक्सान पहुंचाने से रोकता है .
– वनस्पति घी कभी न खाए . ये पित्त बढाता है और शरीर में जम के बैठता है .
– घी को कभी भी मलाई गर्म कर के ना बनाए . इसे दही जमा कर मथने से इसमें प्राण शक्ति आकर्षित होती है . फिर इसको गर्म करने से घी मिलता है

Story Source: पूज्य आचार्य

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