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शक्कर-नमकः कितने खतरनाक ! – Sugar – Nmkः how dangerous!

Sugar

Sugar – Nmkः how dangerous!

Before the development of scientific technology is not used anywhere sugar is used in foods. Sweet fruit sugar or sugary foods less – than – less commuted was used in appropriate amounts. That’s why older people become chronic and Caryskshm lived until the last moments of life.

Nowadays people sat in the illusion that is the sign of a civilized white sugar and molasses, molasses, etc. are cheap, sugary foods for the poor.
By exploiting the inverse elements of the body destroys elements of importance. Mdhuprameh diseases occur as a result.
White sugar and a slow poison (Slow and White Poison) sugars except those who are eating molasses continued decline in their health is such a survey.
Britain says Professor Jhon Yudkin venom white sugar. He has proven that there is no need to physically sugar. Man as milk, fruit, cereal and Shakbaji should use as much sugar as it takes to get her body is.
Only in terms of sugar sweeteners and vitamins is just garbage. Chinese food extravascular blood cholesterol rises, causing the walls are thick. The cause of the complaint arose from the Rktdbaw and heart disease.
The disease is caused by eating excessive sugar Haipoglukemia seems to be faltering, false hunger and never Kaँpakr patient becomes unconscious. Chinese digested in the stomach and small intestine which can generate acid when the jealous type. Kute matter to twenty percent higher acidity. Bekteria child eats sugar and produces acid in the tooth and inflict damage to the teeth. The Chinese are also due to skin diseases. U.S. research by Dr. Heningt Tayramin that a substance contained in chocolate produces headache. Produces sugar and chocolate Adhasishi pain.
So kids Peeprment – tablet, chocolate etc are advised to keep away from sugary foods. 98 percent of children in the U.S. is a disease in which sugar and milk teeth are ascribed substance.
Prishkritikarn due to a variety of minerals, sugars, salts, vitamins or enzymes are no longer balance. Diseases and disorders of the variety of its continued use seems to flourish.
By eating more sugar or sugary calcium and phosphorus balance is upset occurs typically at a ratio of 5 and 2. More sweet food in the digestive system of the body which seems to be a lack of vitamin B complex dyspepsia, indigestion, skin diseases, heart disease, colitis, is conducive to the growth of Snaiutntr disorders.
Overdose of sugar in the liver, thereby decreasing the amount of Glaikojin fatigue, Udwgnita, nervousness, headaches, asthma, diabetes, and premature Miscellaneous Ailments surrounded carry the same period in cheek.
London Medical College of Cardiology most eminent cardiologist Dr Luikin attributes sugars. They Urgaprapti body molasses, dates, raisins, grapes, honey, mango, banana, Mosmmi, watermelon, papaya, sugar cane, sweet potatoes, etc. suggest

Chinese scientists not in relation to –

“Cardiology responsible for sugar as fat. Coffee drinking coffee with sugar so the loss is not as harmful.”
PRO. Jhon Yudkin, London.
“White sugar is a sort of intoxication and deeply serious impacts on the body.”
PRO. Lydia Clarke
Mitkr becomes poison.
White sugar is more harmful than cayenne pepper. The emission of semen diluted with a little water, Rktdbaw, gonorrhea and Mutrvikar is born. Chinese men and women are prone to suffer from Virydosh Pradrrog which benefit by sacrificing amazing. ”
Dr. Surendra Prasad
“Eating disorders of the teeth without removing sugar will never be erased.”
Dr Philip, University of Michigan

Frank Wilson
Similarly, salt (sodium chloride) in the prevalence of food is increasing day by day. Continual savory and spicy foods – a regular growing. Like salt, sugar is very harmful to our bodies. We used the green vegetables, sprouted seeds, etc. are automatically fulfilled our body salts.
Salt Codnewale are free from the disease and those who do not are affected by it.
They Wancit modern comforts us in terms of health even more athletic and healthy. Sugar and salt foods since they are able to meet.
Antibodies are the body’s salt and sugar intake capacity is lost, and who suffer from many diseases.
So the longevity, ever have to be healthy and happy, to live is Sadnamay, sugar and salt that people abandon Please specify the fully or twice a week or salt – Skkrrhit diet, taking their meager daily life eat.
Seeker families in foods salt – sugar intake should be very low. The Wellness happiness will continue and will help to Ishwarbkti.

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शक्कर-नमकः कितने खतरनाक ! 

वैज्ञानिक तकनीक के विकास के पूर्व कहीं भी शक्कर खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त नहीं की जाती थी। मीठे फलों अथवा शर्करायुक्त पदार्थों की शर्करा कम-से-कम रूपान्तरित कर उपयुक्त मात्रा में प्रयुक्त की जाती थी। इसी कारण पुराने लोग दीर्घजीवी तथा जीवन के अंतिम क्षणों तक कार्यसक्षम बने रहते थे।

आजकल लोगों में भ्रांति बैठ गई है कि सफेद चीनी खाना सभ्य लोगों की निशानी है तथा गुड़, शीरा आदि सस्ते शर्करायुक्त खाद्य पदार्थ गरीबों के लिए हैं। यही कारण है कि अधिकांशतः उच्च या मध्यम वर्ग के लोगों में ही मधुमेह रोग पाया जाता है।
श्वेत चीनी शरीर को कोई पोषक तत्त्व नहीं देती अपितु उसके पाचन के लिए शरीर को शक्ति खर्चनी पड़ती है और बदले में शक्ति का भण्डार शून्य होता है। उलटे वह शरीर के तत्वों का शोषण करके महत्व के तत्वों का नाश करती है। सफेद चीनी इन्स्युलिन बनाने वाली ग्रंथि पर ऐसा प्रभाव डालती है कि उसमें से इन्स्युलिन बनाने की शक्ति नष्ट हो जाती है। फलस्वरूप मधुप्रमेह जैसे रोग होते हैं।
शरीर में ऊर्जा के लिए कार्बोहाइड्रेटस में शर्करा का योगदान प्रमुख है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि परिष्कृत शक्कर का ही उपयोग करें। शक्कर एक धीमा एवं श्वेत विष (Slow and White Poison) है जो लोग गुड़ छोड़कर शक्कर खा रहे हैं उनके स्वास्थ्य में भी निरन्तर गिरावट आई है ऐसी एक सर्वेक्षण रिपोर्ट है।
ब्रिटेन के प्रोफेसर ज्होन युडकीन चीनी को श्वेत विष कहते हैं। उन्होंने सिद्ध किया है कि शारीरिक दृष्टि से चीनी की कोई आवश्यकता नहीं है। मनुष्य जितना दूध, फल, अनाज और शाकभाजी उपयोग में लेता है उससे शरीर को जितनी चाहिए उतनी शक्कर मिल जाती है। बहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि चीनी से त्वरित शक्ति मिलती है परन्तु यह बात बिल्कुल भ्रमजनित मान्यता है, वास्तविकता से बहुत दूर है।
चीनी में मात्र मिठास है और विटामिन की दृष्टि से यह मात्र कचरा ही है। चीनी खाने से रक्त में कोलेस्टरोल बढ़ जाता है जिसके कारण रक्तवाहिनियों की दीवारें मोटी हो जाती हैं। इस कारण से रक्तदबाव तथा हृदय रोग की शिकायत उठ खड़ी होती है। एक जापानी डॉक्टर ने 20 देशों से खोजकर यह बताया था कि दक्षिणी अफ्रीका में हब्शी लोगों में एवं मासाई और सुम्बरू जाति के लोगों में हृदयरोग का नामोनिशान भी नहीं, कारण कि वे लोग चीनी बिल्कुल नहीं खाते।
अत्यधिक चीनी खाने से हाईपोग्लुकेमिया नामक रोग होता है जिसके कारण दुर्बलता लगती है, झूठी भूख लगती है, काँपकर रोगी कभी बेहोश हो जाता है। चीनी के पचते समय एसिड उत्पन्न होता है जिसके कारण पेट और छोटी अँतड़ी में एक प्रकार की जलन होती है। कूटे हुए पदार्थ बीस प्रतिशत अधिक एसिडिटी करते हैं। चीनी खानेवाले बालक के दाँत में एसिड और बेक्टेरिया उत्पन्न होकर दाँतों को हानि पहुँचाते हैं। चमड़ी के रोग भी चीनी के कारण ही होते हैं। अमेरिका के डॉ. हेनिंग्ट ने शोध की है कि चॉकलेट में निहित टायरामीन नामक पदार्थ सिरदर्द पैदा करता है। चीनी और चॉकलेट आधाशीशी का दर्द उत्पन्न करती है।
अतः बच्चों को पीपरमेंट-गोली, चॉकलेट आदि शक्करयुक्त पदार्थों से दूर रखने की सलाह दी जाती है। अमेरिका में 98 प्रतिशत बच्चों को दाँतों का रोग है जिसमें शक्कर तथा इससे बने पदार्थ जिम्मेदार माने जाते हैं।
परिष्कृतिकरण के कारण शक्कर में किसी प्रकार के खनिज, लवण, विटामिन्स या एंजाइम्स शेष नहीं रह जाते। जिससे उसके निरन्तर प्रयोग से अनेक प्रकार की बीमारियाँ एवं विकृतियाँ पनपने लगती हैं।
अधिक शक्कर अथवा मीठा खाने से शरीर में कैल्शियम तथा फासफोरस का संतुलन बिगड़ता है जो सामान्यतया 5 और 2 के अनुपात में होता है। शक्कर पचाने के लिए शरीर में कैल्शियम की आवश्यकता होती है तथा इसकी कमी से आर्थराइटिस, कैंसर, वायरस संक्रमण आदि रोगों की संभावना बढ़ जाती है। अधिक मीठा खाने से शरीर के पाचन तंत्र में विटामिन बी काम्पलेक्स की कमी होने लगती है जो अपच, अजीर्ण, चर्मरोग, हृदयरोग, कोलाइटिस, स्नायुतन्त्र संबंधी बीमारियों की वृद्धि में सहायक होती है।
शक्कर के अधिक सेवन से लीवर में ग्लाइकोजिन की मात्रा घटती है जिससे थकान, उद्वग्निता, घबराहट, सिरदर्द, दमा, डायबिटीज आदि विविध व्याधियाँ घेरकर असमय ही काल के गाल में ले जाती हैं।
लन्दन मेडिकल कॉलेज के प्रसिद्ध हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. लुईकिन अधिकांश हृदयरोग के लिए शक्कर को उत्तरदायी मानते हैं। वे शरीर की ऊर्जाप्राप्ति के लिए गुड़, खजूर, मुनक्का, अंगूर, शहद, आम, केला, मोसम्मी, खरबूजा, पपीता, गन्ना, शकरकंद आदि लेने का सुझाव देते

चीनी के संबंध में वैज्ञानिकों के मत –

“हृदयरोग के लिए चर्बी जितनी ही जिम्मेदार चीनी है। कॉफी पीने वाले को कॉफी इतनी हानिकारक नहीं जितनी उसमें चीनी हानि करती है।”
प्रो. ज्होन युडकीन, लंदन।
“श्वेत चीनी एक प्रकार का नशा है और शरीर पर वह गहरा गंभीर प्रभाव डालता है।”
प्रो. लिडा क्लार्क
“सफेद चीनी को चमकदार बनाने की क्रिया में चूना, कार्बन डायोक्साइड, कैल्शियम, फास्फेट, फास्फोरिक एसिड, अल्ट्रामरिन ब्लू तथा पशुओं की हड्डियों का चूर्ण उपयोग में लिया जाता है। चीनी को इतना गर्म किया जाता है कि प्रोटीन नष्ट हो जाता है। अमृत मिटकर विष बन जाता है।
सफेद चीनी लाल मिर्च से भी अधिक हानिकारक है। उससे वीर्य पानी सा पतला होकर स्वप्नदोष, रक्तदबाव, प्रमेह और मूत्रविकार का जन्म होता है। वीर्यदोष से ग्रस्त पुरुष और प्रदररोग से ग्रस्त महिलाएँ चीनी का त्याग करके अदभुत लाभ उठाती हैं।”
डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद
“भोजन में से चीनी को निकाले बिना दाँतों के रोग कभी न मिट सकेंगे।”
डॉ. फिलिप, मिचिगन विश्वविद्यालय
“बालक के साथ दुर्व्यवहार करने वाला माता-पिता को यदि दण्ड देना उचित समझा जाता हो तो बच्चों को चीनी और चीनी से बनी मिठाइयाँ तथा आइसक्रीम खिलाने वाले माता पिता को जेल मे ही डाल दिना चाहिए।”
फ्रेंक विलसन
इसी प्रकार नमक (सोडियम क्लोराइड) का प्रचलन भोजन में दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। चटपटे और मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन नित्य-नियमितरूप से बढ़ता जा रहा है। शक्कर की तरह नमक भी हमारे शरीर के लिए अत्यधिक हानिकारक है। यह शरीर के लिए अनिवार्य है लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक लवण की मात्रा तो हमें प्राकृतिक रूप से खाद्य पदार्थों द्वारा ही मिल जाती है। हमारे द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली हरी सब्जियों से, अंकुरित बीजों आदि से हमारे शरीर में लवण की पूर्ति स्वतः ही हो जाती है।
कुछ वर्षों पूर्व ही एक ख्यातिप्राप्त समाचार पत्र ने अपने आलेख में प्रकाशित कर इस कथन की पुष्टि की थी कि नमक शरीर के लिए जहर से भी अधिक खतरनाक होता है। चिकित्सा विज्ञान के शोधकर्ताओं ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि रक्तचाप के रोगों का प्रमुख कारण ही नमक है, इसलिए हाई ब्लडप्रेशरवाले रोगियों को भोजन में नमक पर प्रतिबन्ध लगाया जाता है। नमक छोड़नेवाले इस रोग से मुक्त हो जाते हैं और जो नहीं छोड़ते वे इससे त्रस्त रहते हैं।
एक सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ कि सुदूर वन्य एवं पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले अनेक आदिवासियों के आहारक्रम में नमक का कोई स्थान नहीं है। आधुनिक सुविधाओं से वंचित् वे लोग स्वास्थ्य की दृष्टि से आज भी हमसे अधिक हृष्ट-पुष्ट एवं स्वस्थ हैं। शक्कर व नमक की पूर्ति वे खाद्य पदार्थों से ही कर लेते हैं।
नमक और शक्कर के अधिक सेवन से शरीर की रोगप्रतिकारक क्षमता का ह्रास होता है तथा उसे अनेक रोगों से जूझना पड़ता है।
अतः जिन्हें दीर्घायु होना है, सदैव स्वस्थ व प्रसन्न बने रहना है, साधनामय जीवन बिताना है, ऐसे लोग शक्कर एवं नमक को पूर्णरूपेण त्याग देवें अथवा सप्ताह में एक या दो बार नमक-शक्कररहित आहार लेते हुए, दैनिक जीवन में इनका अत्यल्प सेवन करें।
साधक परिवारों में खाद्य पदार्थों में नमक-शक्कर का अत्यन्त अल्प सेवन करना चाहिए। इससे आरोग्यता, प्रसन्नता बनी रहेगी तथा ईश्वरभक्ति में अधिक मदद मिलेगी।

Story Source: पूज्य आचार्य

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